
एंड्रॉयड की ओर बढ़त यूजर्स की ओर से स्पष्ट संकेत है, इस बदलाव को नोटिस करना एक टेक-सैवी दोस्त के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

एंड्रॉयड की ओर बढ़ रहे यूजर्स कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
आईफोन लंबे समय तक स्मार्टफोन बाजार पर राज करता रहा है, लेकिन अब यूजर्स एंड्रॉयड डिवाइस की ओर रुख कर रहे हैं। कई कारणों में से कीमत, कस्टमाइजेशन की कमी और ऐप स्टोर के बाहर से ऐप्स इंस्टॉल करने की अनुमति न होना प्रमुख हैं। एंड्रॉयड फोन 30,000 से 40,000 रुपये के बजट में भी उन्नत फीचर्स प्रदान करते हैं, जबकि आईफोन 17e की कीमत लगभग 65,000 रुपये है।
यूजर्स के लिए एंड्रॉयड का एक बड़ा आकर्षण फाइल शेयरिंग और स्टोरेज विकल्पों में लचीलापन है। आईफोन में अभी तक microSD कार्ड स्लॉट या 3.5mm हेडफोन जैक नहीं है। अमेरिका में अब केवल eSIM वाले आईफोन बेचे जा रहे हैं, जो फिजिकल सिम यूजर्स के लिए असुविधा पैदा कर रहा है।
एंड्रॉयड का खुला इकोसिस्टम यूजर्स को थर्ड-पार्टी ऐप्स साइडलोड करने की अनुमति देता है, जबकि आईफोन केवल ऐप स्टोर से ऐप्स इंस्टॉल करने की अनुमति देता है। यह बंद वातावरण कई यूजर्स के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है, खासकर जब वांछित ऐप ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होता।
तथ्य
- 2007 में आईफोन का पहला संस्करण लॉन्च हुआ था।
- सबसे सस्ते आईफोन 17e की कीमत लगभग 65,000 रुपये है।
- 30,000–40,000 रुपये में उन्नत फीचर्स वाले एंड्रॉयड फोन उपलब्ध हैं।
- आईफोन में अभी तक microSD कार्ड स्लॉट या 3.5mm हेडफोन जैक नहीं है।
- अमेरिका में अब केवल eSIM वाले आईफोन बेचे जा रहे हैं।
- एंड्रॉयड यूजर्स थर्ड-पार्टी ऐप्स साइडलोड कर सकते हैं, आईफोन यूजर्स नहीं।
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