
खगोल विज्ञान लैब में दरवाजे-खिड़कियां तक नहीं हैं, इस विषय में रुचि रखने वाले किसी छात्र या शिक्षक के लिए यह संदर्भ उपयोगी है।

करोड़ों की खगोल लैब अधूरी, छात्र पढ़ाई से वंचित कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
भागलपुर में नगर निगम द्वारा 1.23 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई खगोल विज्ञान लैब, ई-लाइब्रेरी और जोनल कार्यालय की परियोजना अधूरी रह गई है। अधूरी डीपीआर (डिज़ाइन और प्राक्कलन रिपोर्ट) और तकनीकी लापरवाही के कारण भवन में बुनियादी सुविधाएं जैसे दरवाजे, खिड़कियां, टाइल्स, शौचालय टंकी और वाटर हार्वेस्टिंग तक नहीं बन पाईं। संवेदक ने फरवरी 2025 तक भवन का ढांचा तो तैयार कर दिया, लेकिन अनुबंध में अतिरिक्त 30 लाख रुपये की आवश्यकता थी, जो अभी तक स्वीकृत नहीं हुए।
इसके कारण छात्र खगोल विज्ञान लैब और ई-लाइब्रेरी में अध्ययन नहीं कर पा रहे हैं। निगम के अधिकारियों का कहना है कि शेष कार्य के लिए अलग से निविदा निकाली जाएगी और 25 मई को सामान्य बोर्ड की बैठक में इसकी स्वीकृति मांगी गई है। इसके अलावा, सम्राट अशोक भवन का निर्माण भी 2015 से अधूरा है, जहां छड़ों के अतिरिक्त भुगतान को लेकर विवाद चल रहा है।
परियोजना की देरी से छात्रों को खगोल विज्ञान की जानकारी तक सीमित पहुंच मिल रही है, जबकि कर्मचारी भी नए कार्यालय में काम नहीं कर पा रहे। निगम प्रशासन पर योजना को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों ने स्वीकृति मिलने पर कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया है।
तथ्य
- भागलपुर में 1.23 करोड़ रुपये की लागत से खगोल विज्ञान लैब, ई-लाइब्रेरी और जोनल कार्यालय का निर्माण अधूरा है।
- डीपीआर में दरवाजे, खिड़कियां, टाइल्स, शौचालय टंकी जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल नहीं थीं।
- फरवरी 2025 में भवन का ढांचा तो तैयार हो गया, लेकिन अतिरिक्त 30 लाख रुपये की आवश्यकता थी।
- नगर निगम ने 25 मई 2026 को सामान्य बोर्ड की बैठक में शेष कार्य के लिए स्वीकृति मांगी है।
- सम्राट अशोक भवन का निर्माण 2015 से अधूरा है, जहां छड़ों के भुगतान को लेकर विवाद है।
- छात्र खगोल विज्ञान लैब और ई-लाइब्रेरी में अध्ययन नहीं कर पा रहे हैं।
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