
एक छोटी फिल्म की वैश्विक जीत, जो कहानी की ताकत को दिखाती है, इसे देखने वाले किसी फिल्म प्रेमी के लिए खास संदर्भ लेकर आती है।

नेपाल की फिल्म ने कान्स में इतिहास रचा कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
नेपाल की स्वतंत्र फिल्म 'एलीफेंट्स इन द फॉग' ने 2026 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में 'अन सर्टेन रिगार्ड' सेक्शन में जूरी प्राइज जीतकर इतिहास रच दिया। यह नेपाल की पहली फिल्म थी जो कान्स में प्रतिस्पर्धा में शामिल हुई। फिल्म एक गांव में रहने वाली ट्रांसजेंडर महिलाओं के जीवन, उनके रिश्तों और अस्तित्व के संकट पर आधारित है। निर्देशक अविनाश विक्रम शाह ने कोहरे, हाथियों और अदृश्यता के माध्यम से समुदाय के सम्मान और संघर्ष को दर्शाया।
फिल्म का निर्माण फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील और नॉर्वे जैसे देशों के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हुआ, क्योंकि नेपाल में स्वतंत्र फिल्मों के लिए आधिकारिक फंडिंग संरचना कमजोर है। फिर भी, नेपाल के सरकारी प्रतिनिधियों ने कान्स में फिल्म टीम के साथ खड़े होकर सांस्कृतिक समर्थन दिखाया, जिसमें काठमांडू की उपमहापौर सुनीता डंगोल भी शामिल थीं।
इसके विपरीत, भारतीय सिनेमा के लिए यह घटना एक आलोचनात्मक आईना बन गई। 2024 में कान्स जीतने वाली पायल कपाड़िया की फिल्म को भारत सरकार ने सिर्फ सोशल मीडिया पर बधाई दी, जबकि उनके खिलाफ पुराने मामले जारी रहे। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उनकी फिल्म को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री नहीं चुना, उसे 'यूरोपीय' और 'नकारात्मक' कहकर खारिज कर दिया।
यह तुलना दिखाती है कि कैसे छोटे देश भी सांस्कृतिक समर्थन और आत्मविश्वास से वैश्विक मंच पर छाप छोड़ सकते हैं, जबकि बड़े फिल्म उद्योग भी रूढ़ियों और दोहरे मापदंडों के कारण पीछे रह जाते हैं। 'एलीफेंट्स इन द फॉग' की जीत साबित करती है कि कहानी की गहराई और सामाजिक संवेदनशीलता, बजट या प्रचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
तथ्य
- नेपाल की फिल्म 'एलीफेंट्स इन द फॉग' ने 2026 में कान्स फिल्म फेस्टिवल के 'अन सर्टेन रिगार्ड' सेक्शन में जूरी प्राइज जीता।
- यह नेपाल की पहली फिल्म थी जो कान्स में प्रतिस्पर्धा में शामिल हुई।
- फिल्म ट्रांसजेंडर महिलाओं के संघर्ष और अस्तित्व पर आधारित है और अविनाश विक्रम शाह द्वारा निर्देशित है।
- फिल्म को फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील और नॉर्वे के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से फंड किया गया।
- नेपाल की उपमहापौर सुनीता डंगोल कान्स में फिल्म टीम के साथ मौजूद थीं, जबकि भारतीय सरकार ने पायल कपाड़िया की कान्स जीत के बाद केवल सोशल मीडिया पर बधाई दी।
- फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने पायल कपाड़िया की फिल्म को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री नहीं चुना, उसे 'यूरोपीय' और 'नकारात्मक' कहकर खारिज कर दिया।
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