एक विज्ञान-आधारित वेबटून जो दिल्ली में तेज गर्मी के बाद अचानक आए धूल भरे तूफान की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से दिखाता है, जिसमें संवहन धाराएं, डाउनड्राफ्ट और IMD के अनुमान की सीमाएं शामिल हैं।
एक विज्ञान-आधारित वेबटून जो दिल्ली में तेज गर्मी के बाद अचानक आए धूल भरे तूफान की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से दिखाता है, जिसमें संवहन धाराएं, डाउनड्राफ्ट और IMD के अनुमान की सीमाएं शामिल हैं।

तेज गर्मी में अचानक आया तूफान, इस विज्ञान की बात को देख रहे किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

दिल्ली में 115 किमी/घंटा का धूल भरा तूफान कैसे आया? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

दिल्ली-एनसीआर में 10 जून 2026 को 45 डिग्री सेल्सियस की तापमान के बीच अचानक 115 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से धूल भरा तूफान आया, जिसने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 पर तीन विमानों को नुकसान पहुंचाया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसके लिए केवल 60 किमी प्रति घंटा की चेतावनी जारी की थी, जो तूफान की वास्तविक तीव्रता को नहीं दर्शा पाई।

यह तूफान गर्मी के कारण उत्पन्न संवहन धाराओं (convection currents) का परिणाम था। राजस्थान और हरियाणा की गर्म जमीन ने सतह की हवा को गर्म किया, जो हल्की होकर ऊपर उठी। इसकी जगह ठंडी हवा नीचे आई, जिससे तेज हवाओं का चक्र शुरू हुआ। जब यह प्रक्रिया तेज होती है, तो धूल भरी आंधी तूफान में बदल जाती है।

इस घटना को डाउनड्राफ्ट (downburst) भी कहा जा सकता है, जहां बारिश के साथ नीचे आती हवा जमीन से टकराकर चारों ओर फैल जाती है। ऐसे तूफान अक्सर माइक्रो बर्स्ट होते हैं — केवल 4 किमी या उससे कम क्षेत्र में सीमित, जिसे रडार या मॉडल्स द्वारा पूर्वानुमानित करना कठिन होता है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में ऐसी चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है।

तथ्य

  • 10 जून 2026 को दिल्ली के पालम इलाके में 115 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से धूल भरा तूफान आया।
  • IMD ने केवल 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार की चेतावनी जारी की थी।
  • तूफान के कारण इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 पर तीन विमानों को नुकसान पहुंचा।
  • तेज गर्मी से उत्पन्न संवहन धाराएं (convection currents) तूफान का मुख्य कारण थीं।
  • माइक्रो बर्स्ट जैसी छोटे पैमाने की घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना मौसम विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार जलवायु परिवर्तन से धूल भरी आंधियों की आवृत्ति बढ़ रही है।

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