
अब जब आवाज़ भी नकली हो सकती है, यह फीचर एक दोस्त के लिए जानकारी का सही संदर्भ बन सकता है।

गूगल फोन ऐप में आया नया सुरक्षा फीचर कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
गूगल ने एंड्रॉयड 12 या उसके बाद के संस्करण वाले डिवाइस के लिए अपने ऑफिशियल फोन ऐप में एक नया फेक कॉल डिटेक्शन फीचर जोड़ा है। यह फीचर AI-संचालित वॉयस क्लोनिंग स्कैम को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहां धोखेबाज़ आपके परिचितों की आवाज़ की नकल करके आपसे पैसे मांगते हैं। यह फीचर तभी काम करता है जब आप और आपका संपर्क दोनों Google के फोन ऐप का उपयोग कर रहे हों।
फीचर के तहत, कॉल के दौरान डिवाइस के बीच एक डिजिटल हैंडशेक होता है। जब कोई संपर्क आपको कॉल करता है, तो उसका डिवाइस आपके डिवाइस को एक साइलेंट कन्फर्मेशन सिग्नल भेजता है। अगर यह सिग्नल नहीं मिलता, तो आपका फोन इसे संदिग्ध मानता है और एक चेतावनी दिखाता है। यह प्रक्रिया एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड RCS तकनीक के माध्यम से होती है, जिससे गोपनीयता बनी रहती है।
इंटरपोल के अनुसार, 2026 में ऐसे फ्रॉड से 400 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है। यह फीचर इसी खतरे के खिलाफ एक कदम है। फीचर को वैश्विक स्तर पर रोल आउट किया जा रहा है, जिसमें पहले पिक्सल डिवाइस और फिर अन्य ब्रांडों के फोन में उपलब्ध होगा। उपयोगकर्ता किसी भी समय सेटिंग्स में जाकर इसे बंद कर सकते हैं।
तथ्य
- गूगल ने एंड्रॉयड 12+ डिवाइस के लिए फेक कॉल डिटेक्शन फीचर लॉन्च किया है, जो जून 2026 में रोल आउट हो रहा है।
- फीचर कॉल के दौरान डिवाइस के बीच डिजिटल हैंडशेक के जरिए AI वॉयस क्लोनिंग स्कैम का पता लगाता है।
- इंटरपोल के मार्च 2026 के आकलन के अनुसार, नकली फ्रॉड से दुनिया भर में 400 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ।
- फीचर केवल तभी काम करता है जब दोनों पक्ष Google के फोन ऐप का उपयोग कर रहे हों।
- यह प्रक्रिया एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड RCS तकनीक के माध्यम से होती है, जो गोपनीयता सुनिश्चित करती है।
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