
भारत की अजरबैजान के साथ नई कूटनीतिक पहल, इस तरह के रिश्तों में दिलचस्पी रखने वाले एक सहकर्मी के लिए भी समझने लायक संदर्भ देती है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की अजरबैजान से नई बातचीत कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अजरबैजान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए नई कूटनीतिक पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से अजरबैजान के राष्ट्रपति को ईद की शुभकामनाएं भेजी गईं, जो नए संवाद की शुरुआत का संकेत है। पिछले महीने बाकू में भारत और अजरबैजान के विदेश विभाग के अधिकारियों के बीच छठे दौर की फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन वार्ता हुई, जो 2022 के बाद पहली थी। इस बातचीत के जरिए भारत ने आतंकवाद के प्रति अपनी शून्य सहिष्णुता नीति पर प्रतिबद्धता दोहराई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अजरबैजान के साथ तुर्की की तरह रणनीति नहीं अपनाना चाहता, जहां तुर्की का भारत के प्रति रवैया नकारात्मक रहा है, खासकर कश्मीर मुद्दे पर। अजरबैजान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नकारात्मक रुख अपनाया था, लेकिन बहुत मुखर नहीं हुआ। इसलिए भारत को उम्मीद है कि सकारात्मक संपर्क से अजरबैजान कम से कम एक निष्पक्ष रवैया अपना सकता है।
इसी दौरान, भारत ने साइप्रस के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जून 2025 में साइप्रस की यात्रा की, जो दो दशकों में पहली थी। साइप्रस के राष्ट्रपति हाल ही में भारत आए, और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी साइप्रस में यूरोपीय देशों की बैठक में शामिल हुए। दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में गहन सहयोग हुआ है।
तथ्य
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अजरबैजान के साथ नए सिरे से कूटनीतिक संवाद शुरू किया।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू ने अजरबैजान के राष्ट्रपति को ईद की शुभकामनाएं भेजीं।
- अप्रैल 2026 में बाकू में भारत-अजरबैजान के विदेश विभाग अधिकारियों के बीच छठे दौर की वार्ता हुई।
- भारत ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर प्रतिबद्धता दोहराई।
- साइप्रस के राष्ट्रपति हाल ही में भारत की यात्रा पर आए थे।
- पीएम मोदी ने जून 2025 में साइप्रस की यात्रा की, जो दो दशकों में पहली थी।
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