एक सैन्य नेता ईरान के झंडे के सामने खड़ा है, पृष्ठभूमि में मिसाइल लॉन्च की तस्वीर।
एक सैन्य नेता ईरान के झंडे के सामने खड़ा है, पृष्ठभूमि में मिसाइल लॉन्च की तस्वीर।

इजरायल पर मिसाइल हमले के फैसले में अहमद वाहिदी की भूमिका, इस बदलाव को देख रहे किसी सहकर्मी के लिए समझने लायक संदर्भ देती है।

ईरान के नए 'बॉस' की ताकत कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

ईरान ने 2026 में इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला करके क्षेत्रीय तनाव को नई ऊंचाई दे दी। यह कदम 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद ईरान और इजरायल के बीच पहली सीधी सैन्य कार्रवाई थी। इस निर्णय के पीछे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी की अहम भूमिका रही। वाहिदी ने ईरानी नेतृत्व को मनाया कि लेबनान में हिजबुल्लाह पर हो रहे इजरायली हमलों के जवाब में कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

वाहिदी को ईरान में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक माना जा रहा है। 67 वर्षीय वाहिदी ने अमेरिका के साथ किसी समझौते के लिए शर्तें रखी हैं और ईरानी सैन्य ताकत को मजबूत करने पर जोर दिया है। उनका राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से कई मुद्दों पर मतभेद रहा है, लेकिन अधिकांश मामलों में उनकी राय मानी गई है।

वाहिदी की उभरती ताकत का कारण अमेरिका-इजरायल गठबंधन के हवाई हमलों में IRGC के पूर्व कमांडर मोहम्मद पापोर की मौत भी है। फरवरी 2026 में उनकी नियुक्ति एक संकटकालीन समय में हुई, जब ईरान सैन्य और राजनीतिक रूप से अस्थिर था। वाहिदी का लंबा करियर IRGC के खुफिया विभाग और कुद्स फोर्स में रहा है, जहां उन्होंने हिजबुल्लाह को मजबूत करने में भी भूमिका निभाई।

तथ्य

  • अहमद वाहिदी ने ईरान के इजरायल पर मिसाइल हमले के फैसले में अहम भूमिका निभाई।
  • वाहिदी ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को मिसाइल लॉन्च के लिए मनाने में सफल रहे।
  • वाहिदी को अमेरिका से बातचीत में ईरान के अडिग रुख के पीछे मुख्य ताकत माना जा रहा है।
  • वाहिदी ने अमेरिका के साथ समझौते के लिए अपनी शर्तें रखी हैं।
  • वाहिदी ने 1994 के ब्यूनस आयर्स बम धमाके के आरोप में अंतरराष्ट्रीय 'वांछित' व्यक्ति हैं।
  • वाहिदी ने 28 फरवरी 2026 को IRGC के कमांडर के रूप में पदभार संभाला।

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