होर्मुज स्ट्रेट पर एक जहाज के गुजरते हुए के साथ ईरान और ओमान के झंडे, और ट्रांजिट फीस के चिन्ह के साथ एक चेतावनी बोर्ड।
होर्मुज स्ट्रेट पर एक जहाज के गुजरते हुए के साथ ईरान और ओमान के झंडे, और ट्रांजिट फीस के चिन्ह के साथ एक चेतावनी बोर्ड।

होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्तें लागू होना, तेल आपूर्ति पर नजर रखने वाले किसी दोस्त के लिए उपयोगी संदर्भ देता है।

होर्मुज में नई शर्तें, जहाजों से फीस कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

ईरान और ओमान ने होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से जहाजों के गुजरने के लिए नई शर्तें लागू करने की घोषणा की है, जिसमें ट्रांजिट फीस का वसूली शामिल है। यह स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। ईरानी राजदूत काजेम जलाली ने रूसी अखबार इजवेस्टिया को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि स्ट्रेट खुला रहेगा, लेकिन अब यह ईरान और ओमान की सहमति से निर्धारित शर्तों के तहत संचालित होगा।

फीस की राशि और गणना के आधार के बारे में अभी स्पष्टता नहीं है। ईरान का तर्क है कि वह और ओमान स्ट्रेट से जुड़ी आवश्यक सेवाएं प्रदान करते हैं, इसलिए फीस उचित है। इस घोषणा के बाद अमेरिका ने कड़ा विरोध जताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई के अंत में ओमान को चेतावनी दी थी कि वह ईरान के साथ मिलकर ट्रांजिट टोल लगाने की कोशिश में शामिल न हो।

इस बीच, इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद हमले जारी हैं। इजरायल ने पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। युद्ध के कारण पहले से ही तेल की आपूर्ति बाधित है, और नई फीस नीति से वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। जापान ने सोमवार को कहा कि उसका एक तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा और उसने कोई फीस नहीं दी।

तथ्य

  • ईरानी राजदूत काजेम जलाली ने 8 जून 2026 को घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा लेकिन ईरान और ओमान द्वारा तय की गई नई शर्तों के तहत संचालित होगा।
  • नई शर्तों में जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूलना शामिल है, हालांकि फीस की राशि और आधार अभी स्पष्ट नहीं है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई 2026 में ओमान को चेतावनी दी थी कि वह ईरान के साथ मिलकर ट्रांजिट टोल लगाने की कोशिश में शामिल न हो।
  • जापान ने 8 जून 2026 को कहा कि उसका एक तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरा और उसने कोई ट्रांजिट फीस नहीं दी।
  • इजरायल ने 8 जून 2026 को पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

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