
ईरान के लिए यह समझौता अपनी सीमारेखाओं की सुरक्षा का मौका है, जिसकी वजह से एक दोस्त जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति देख रहा है, उसे यह संदर्भ देखने में मदद मिल सकती है।

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की तैयारी कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
ईरान और अमेरिका के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है, जिसके तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है और ईरान की फ्रीज राशि जारी की जा सकती है। ईरान की सरकारी एजेंसी आईआरएनए ने स्पष्ट किया कि कोई भी एमओयू तब तक अंतिम नहीं माना जाएगा जब तक दोनों पक्ष औपचारिक रूप से इसे मंजूरी नहीं दे देते। इस बीच, ईरान ने अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को बरकरार रखने की मांग की है, जबकि इसराइल ने एनरिच्ड यूरेनियम हटाने और एनरिचमेंट संरचना खत्म करने की मांग की है।
समझौते के प्रस्तावित मसौदे में सभी मोर्चों पर युद्धविराम, लेबनान में संघर्ष समाप्ति, और तेल प्रतिबंधों में राहत शामिल है। बातचीत का पहला चरण युद्ध समाप्ति पर केंद्रित है, जबकि अगले 60 दिनों में परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और मुआवजे पर चर्चा होगी। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह किसी नई परमाणु प्रतिबद्धता को स्वीकार नहीं करेगा।
हालांकि, अमेरिका के बार-बार रुख बदलने और नई मांगें रखने को लेकर ईरान सतर्क है। आईआरएनए ने कहा कि अंतिम मसौदे को ईरान की निर्णय लेने वाली संस्थाओं की मंजूरी चाहिए। इसराइल ने खुद को इस समझौते से अलग रखा है, जो इस प्रक्रिया में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
तथ्य
- 12 जून को ईरान की आईआरएनए ने कहा कि कोई भी समझौता तब तक अंतिम नहीं होगा जब तक दोनों पक्ष औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं दे देते।
- समझौते के मसौदे में सभी मोर्चों पर युद्धविराम, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान की फ्रीज संपत्ति जारी करना शामिल है।
- ईरान ने स्पष्ट किया कि वह अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को बरकरार रखेगा और कोई नई परमाणु प्रतिबद्धता स्वीकार नहीं करेगा।
- इसराइल ने समझौते में एनरिच्ड यूरेनियम हटाने और एनरिचमेंट संरचना खत्म करने की मांग की है।
- ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने अमेरिका पर बार-बार रुख बदलने का आरोप लगाया है।
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