
ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर उनकी चुनौतीपूर्ण थ्योरी, इस विषय में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के लिए गहरी समझ का संदर्भ देती है।

जयंत नारलीकर को मरणोपरांत विज्ञान रत्न पुरस्कार कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
प्रख्यात भारतीय खगोल भौतिक विज्ञानी जयंत नारलीकर को 2025 में विज्ञान रत्न पुरस्कार से मरणोपरांत सम्मानित किया गया है। यह भारत सरकार का सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मान है, जो उनके ब्रह्मांड विज्ञान में अग्रणी योगदान के लिए दिया गया। नारलीकर ने ब्रिटिश खगोलशास्त्री फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर 'स्टेडी स्टेट थ्योरी' विकसित की, जो बिग बैंग सिद्धांत के विपरीत थी। इस सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक क्षण में नहीं, बल्कि निरंतर नए पदार्थों के निर्माण के साथ होती रही है।
नारलीकर का निधन 20 मई 2024 को 86 वर्ष की आयु में हो गया था। उनके कार्य ने 20वीं सदी में खगोल विज्ञान की चर्चाओं को गहराई दी और वैज्ञानिक सोच में विविधता लाई। राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की शुरुआत 2023 में हुई थी, जिसके तहत 'विज्ञान रत्न' सबसे ऊँचा सम्मान है।
इसी घोषणा में आठ वैज्ञानिकों को विज्ञान श्री पुरस्कार और 14 को विज्ञान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सीएसआईआर की अरोमा मिशन टीम को भी विज्ञान टीम पुरस्कार दिया गया, जिसने जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर उत्पादन को बढ़ावा दिया।
तथ्य
- जयंत नारलीकर को 2025 में विज्ञान रत्न पुरस्कार मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
- नारलीकर का निधन 20 मई 2024 को 86 वर्ष की आयु में हुआ था।
- उन्होंने फ्रेड हॉयल के साथ 'स्टेडी स्टेट थ्योरी' का विकास किया, जो बिग बैंग सिद्धांत के विपरीत थी।
- विज्ञान रत्न भारत सरकार का सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मान है।
- 2025 के लिए आठ वैज्ञानिकों को विज्ञान श्री पुरस्कार घोषित किए गए।
- CSIR की अरोमा मिशन टीम को विज्ञान टीम पुरस्कार दिया गया।
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