एक फोन कॉल में एआई एजेंट के साथ जुड़े आइकन और भारतीय भाषाओं के टेक्स्ट के साथ जियो का लोगो दिखाता कवर आर्ट
एक फोन कॉल में एआई एजेंट के साथ जुड़े आइकन और भारतीय भाषाओं के टेक्स्ट के साथ जियो का लोगो दिखाता कवर आर्ट

जियो के एआई कदम की ठोस बात, इस विषय को देख रहे किसी दोस्त या सहकर्मी के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

जियो कॉल में अब एआई एजेंट कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

रिलायंस जियो अपने नेटवर्क में एआई को एकीकृत करने की तैयारी में है। कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी ने घोषणा की कि जियो कॉल एजेंट के जरिए अब फोन कॉल में भी एआई सहायता मिलेगी। ग्राहक की अनुमति के बाद यह एआई एजेंट कॉल को ट्रांसक्राइब कर सकेगा, उसकी सारांश तैयार कर सकेगा और कैब बुक, खाना ऑर्डर, टेबल रिजर्व या मीटिंग तय जैसे काम भी कर सकेगा।

यह पहला मौका होगा जब किसी भारतीय टेलिकॉम ऑपरेटर ने नेटवर्क कॉलिंग में सीधे एआई असिस्टेंट की सुविधा देने की घोषणा की हो। अभी तक ऐसी सुविधाएं केवल इंटरनेट-आधारित मीटिंग ऐप्स जैसे जूम या गूगल मीट पर उपलब्ध थीं। जियो का लक्ष्य एआई को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराना है। कंपनी 22 भारतीय भाषाओं में एआई सेवाएं देने की तैयारी कर रही है।

रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है। जियो ने गूगल, मेटा और एनवीडिया के साथ साझेदारी की है। कंपनी का लक्ष्य एआई को आसान, भरोसेमंद और किफायती बनाना है, जिस तरह डेटा को किफायती बनाया गया था। इस पहल के जरिए जियो भारत में एआई के क्षेत्र में गेम चेंजर बनने की उम्मीद कर रहा है।

तथ्य

  • जियो कॉल एजेंट की मदद से फोन कॉल में एआई एजेंट को जोड़ा जा सकेगा, जो कॉल को ट्रांसक्राइब और सारांश तैयार कर सकेगा।
  • आकाश अंबानी ने कहा कि जियो भारतीय भाषाओं में एआई बना रहा है और 22 भारतीय भाषाओं में सेवाएं देने की तैयारी कर रहा है।
  • रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है।
  • जियो ने गूगल, मेटा और एनवीडिया के साथ एआई के क्षेत्र में साझेदारी की है।
  • मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत को एआई का निर्माता और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए।

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