एक कलात्मक छवि जिसमें बर्फीला चंद्रमा यूरोपा पृथ्वी की कक्षा में चमकता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि पृथ्वी की सतह से इसे देखा जा रहा है।
एक कलात्मक छवि जिसमें बर्फीला चंद्रमा यूरोपा पृथ्वी की कक्षा में चमकता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि पृथ्वी की सतह से इसे देखा जा रहा है।

यूरोपा की चमक और उसके नीचे छिपे समुद्र का रहस्य, इस विषय में गहराई से जानने वाले किसी सहकर्मी के लिए भी यह संदर्भ उपयोगी हो सकता है।

यूरोपा पृथ्वी की कक्षा में आए तो क्या होगा? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा के बारे में एक दिलचस्प तथ्य साझा किया है। अगर यूरोपा पृथ्वी की कक्षा में होता, तो वह रात के आसमान में हमारे चंद्रमा से लगभग पांच गुना अधिक चमकीला दिखाई देता, क्योंकि इसकी बर्फीली सतह सूर्य के प्रकाश को अधिक परावर्तित करती है। यह चंद्रमा पृथ्वी के चंद्रमा के आकार का लगभग 90 प्रतिशत है।

वैज्ञानिकों की दिलचस्पी यूरोपा की सतह के नीचे मौजूद विशाल तरल महासागर के प्रति है। माना जाता है कि मोटी बर्फ की परत के नीचे एक ऐसा समुद्र है जहां जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं। इसी कारण यूरोपा अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बना हुआ है।

इस रहस्य को सुलझाने के लिए नासा ने 'यूरोपा क्लिपर' मिशन शुरू किया है। यह मिशन 2.9 अरब किलोमीटर की यात्रा के बाद अप्रैल 2030 में बृहस्पति तक पहुंचेगा। वहां से यह यूरोपा के करीब 49 बार उड़ान भरकर वैज्ञानिक डेटा एकत्र करेगा। मिशन में नौ उन्नत वैज्ञानिक उपकरण और एक गुरुत्वाकर्षण प्रयोग शामिल हैं, जो यूरोपा की संरचना और रहने योग्यता का पता लगाने में मदद करेंगे।

तथ्य

  • अगर यूरोपा पृथ्वी की कक्षा में होता, तो वह चंद्रमा से लगभग पांच गुना अधिक चमकीला दिखाई देता।
  • यूरोपा बृहस्पति का चौथा सबसे बड़ा चंद्रमा है और पृथ्वी के चंद्रमा के आकार का लगभग 90% है।
  • माना जाता है कि यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे एक विशाल तरल महासागर मौजूद है।
  • नासा का 'यूरोपा क्लिपर' मिशन अप्रैल 2030 में बृहस्पति तक पहुंचेगा।
  • मिशन के दौरान यूरोपा के करीब 49 बार फ्लाईबाई किए जाएंगे।
  • मिशन का उद्देश्य यूरोपा के वातावरण और जीवन की संभावना का पता लगाना है।

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