
मंगल पर सल्फर क्रिस्टल की खोज जैसी जानकारी, इस विषय में गहराई से जुड़े किसी दोस्त के लिए भी समझने लायक संदर्भ देती है।

मंगल पर 1761 नमूनों की जांच, कैसे काम करता है यह सेंसर? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
कनाडा का अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) मंगल ग्रह पर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर पर स्थापित है और लगातार चट्टानों व मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण कर रहा है। अब तक इसने 1761 नमूनों की जांच कर 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट पृथ्वी पर भेजी हैं। यह उपकरण रोवर की रोबोटिक भुजा पर लगा है और नमूनों पर एक्स-रे व अल्फा कण डालकर उनकी रासायनिक संरचना का पता लगाता है।
APXS दिन-रात काम कर सकता है क्योंकि यह थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से चलता है, जो सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं है। इसके कारण रोवर मंगल की कठोर जलवायु में भी सक्रिय रहता है। एक विस्तृत विश्लेषण में दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि त्वरित जांच 10 मिनट में पूरी हो जाती है।
2024 में APXS ने एक टूटी चट्टान में शुद्ध सल्फर क्रिस्टल की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो मंगल पर पहली बार मिले थे। यह खोज ग्रह के प्राचीन वातावरण को समझने में मदद कर रही है। कनाडा ने अपनी भागीदारी 2029 तक बढ़ा दी है, जिससे आगे के वर्षों में और खोजों की उम्मीद है।
तथ्य
- APXS ने अब तक 1761 नमूनों का विश्लेषण कर 3943 रिपोर्ट पृथ्वी पर भेजी हैं।
- 2024 में APXS ने मंगल पर शुद्ध सल्फर क्रिस्टल की पहली खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- APXS थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से चलता है, जिससे यह दिन-रात और कड़के मौसम में भी काम कर सकता है।
- एक विस्तृत विश्लेषण में 2-3 घंटे लगते हैं, जबकि त्वरित जांच 10 मिनट में पूरी होती है।
- कनाडा ने अपनी मिशन भागीदारी मार्च 2029 तक बढ़ा दी है।
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