एक युवा भारतीय एथलीट, विनोद सिंह, ट्रैक पर दौड़ते हुए, जिसके पीछे झंडे और खिलाड़ियों की भीड़ है।
एक युवा भारतीय एथलीट, विनोद सिंह, ट्रैक पर दौड़ते हुए, जिसके पीछे झंडे और खिलाड़ियों की भीड़ है।

गरीबी से लड़कर ट्रैक पर सफलता, इस खेल यात्रा का संदर्भ एक ऐसे दोस्त के लिए भी मायने रखता है जो खेल के जरिए बदलाव की तलाश में है।

मध्य प्रदेश के विनोद ने जीता सिल्वर कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

21 साल के विनोद सिंह ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से आते हुए रांची में आयोजित एथलेटिक्स फेडरेशन कप 2026 की 5000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीता। एक किसान परिवार में छह भाई-बहनों में सबसे छोटे विनोद के पिता के पास सिर्फ दो से ढाई बीघा जमीन है, जिससे परिवार का पालन-पोषण मुश्किल है। बेहतर भोजन और सम्मान पाने के लिए उन्होंने दौड़ना शुरू किया।

विनोद की खेल यात्रा भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर बनने तक पहुंची। दो साल पहले उन्होंने मध्य प्रदेश एथलेटिक्स एकेडमी में प्रवेश लिया, जहां अनुशासित प्रशिक्षण और संतुलित आहार ने उनकी जीवनशैली बदल दी। उन्होंने कहा कि एकेडमी में शामिल होने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

पान सिंह तोमर की तुलना में विनोद की यात्रा अक्सर की जाती है, क्योंकि दोनों ने आर्थिक तंगी में खेल के जरिए सम्मान पाने की शुरुआत की। लेकिन जहां पान सिंह चंबल के डकैत बन गए, वहीं विनोद खेल के माध्यम से समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल कर रहे हैं। उनके कोच संदीप सिंह ने उनकी मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण को सफलता का मुख्य कारण बताया।

तथ्य

  • 21 वर्षीय विनोद सिंह ने रांची में आयोजित एथलेटिक्स फेडरेशन कप 2026 की 5000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीता।
  • विनोद मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक किसान परिवार से आते हैं, जिनके पिता के पास दो से ढाई बीघा जमीन है।
  • विनोद पिछले साल भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर के रूप में भर्ती हुए।
  • दो साल पहले उन्होंने मध्य प्रदेश एथलेटिक्स एकेडमी में प्रवेश लिया, जहां उन्हें अनुशासित प्रशिक्षण और संतुलित आहार मिला।
  • विनोद ने कहा कि एकेडमी में शामिल होने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
  • उनके कोच संदीप सिंह ने उनकी सफलता का श्रेय उनकी मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण को दिया।

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