
राफेल की यह क्षमता भारत जैसे देश के लिए उपयोगी है, जो ड्रोन घुसपैठ की चुनौती से जूझ रहा है, इसलिए इस घटना का संदर्भ एक रक्षा रुचि रखने वाले सहकर्मी के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

राफेल ने लातविया में रूसी ड्रोन मार गिराया कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान ने लातविया के हवाई क्षेत्र में एक रूसी मानवरहित हवाई वाहन (UAV) को मार गिराया। यह नाटो के त्वरित प्रतिक्रिया विमानन मिशन के तहत एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि यह पहली बार था जब नाटो बलों ने लातविया के ऊपर भटके हुए ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। ड्रोन यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में चल रहे भारी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के कारण अपना रास्ता भटक गया था। लातविया की सेना ने पुष्टि की कि विदेशी UAV रूसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के प्रभाव में आकर उनके एयरस्पेस में घुस आया था।
दो राफेल विमान लिथुआनिया के सियाउलियाई एयरबेस से उड़ान भरे और स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10:00 बजे ड्रोन को मार गिराया। राफेल के आधुनिक RBE2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सुइट ने कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे लक्ष्य को सटीकता से ट्रैक करने में सफलता हासिल की। यह घटना राफेल की उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की प्रभावशीलता को उजागर करती है।
भारत के लिए यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वायुसेना भी राफेल विमानों का संचालन करती है। भारत पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर छोटे ड्रोनों के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी की घुसपैठ का सामना करता है। साथ ही, चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उन्नत इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स का उपयोग करती है। लातविया में राफेल की सफलता दर्शाती है कि भारतीय राफेल भी ऐसे चुनौतीपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक वातावरण में दुश्मन के ड्रोन को ढूंढकर मार गिराने में सक्षम हैं।
तथ्य
- फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान ने लातविया के हवाई क्षेत्र में एक रूसी मानवरहित हवाई वाहन (UAV) को मार गिराया।
- यह नाटो के त्वरित प्रतिक्रिया विमानन मिशन के तहत लातविया के ऊपर पहली बार ड्रोन इंटरसेप्ट करने की घटना थी।
- लातविया की सेना ने कहा कि ड्रोन रूसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के प्रभाव में आकर भटक गया था।
- राफेल के RBE2 AESA रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सुइट ने कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे ड्रोन को सफलतापूर्वक ट्रैक किया।
- दो राफेल विमान लिथुआनिया के सियाउलियाई एयरबेस से उड़ान भरे और स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 10:00 बजे ड्रोन को मार गिराया।
- भारतीय वायुसेना भी राफेल विमान संचालित करती है और पाकिस्तान-चीन सीमाओं पर ड्रोन घुसपैठ की चुनौती का सामना करती है।
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