
एक समय में छूटे मौके भी आगे की राह बना देते हैं, इस बात को देख रहे किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देती है।

अमिताभ की वजह से छूटी थीं ये दो फिल्में कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
बॉलीवुड अभिनेता राज बब्बर ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1980 के दशक में उन्हें दो बड़ी फिल्मों 'शक्ति' और 'नमक हलाल' से छलांग लगते देखा गया था। उनके अनुसार, दोनों फिल्मों में उनके लिए जगह थी, लेकिन निर्माताओं ने अंततः अमिताभ बच्चन को लेने का फैसला किया। उस समय बच्चन फिल्म उद्योग के सबसे बड़े स्टार थे, और निर्माताओं को लगा कि उनकी मौजूदगी फिल्म के लिए बेहतर होगी।
राज बब्बर ने 'इंसाफ का तराजू' (1980) के बाद पहचान बनाई, लेकिन इन दो फिल्मों से छूटने का अनुभव उनके लिए एक कड़वा झटका था। फिर भी, उन्होंने इसे व्यक्तिगत नहीं लिया और आगे बढ़ते हुए 'निकाह', 'उमराव जान', 'संसार' और 'सुहागन' जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया।
दिलचस्प बात यह है कि बाद में राज बब्बर और अमिताभ बच्चन ने फिल्म 'याराना' में साथ काम किया। इसके अलावा, राज बब्बर ने 1989 में राजनीति में भी कदम रखा और लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रहे। आज भी वह उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपने दम पर फिल्म उद्योग में अलग पहचान बनाई।
तथ्य
- राज बब्बर को फिल्म 'शक्ति' के लिए चुना गया था, लेकिन बाद में अमिताभ बच्चन को कास्ट कर दिया गया।
- उन्होंने दावा किया कि फिल्म 'नमक हलाल' के लिए भी उन्हें साइन किया गया था, लेकिन बाद में उनकी जगह किसी बड़े स्टार को ले लिया गया।
- राज बब्बर ने 1980 में फिल्म 'इंसाफ का तराजू' से चर्चा में आना शुरू किया।
- दोनों अभिनेताओं ने बाद में फिल्म 'याराना' में साथ काम किया।
- राज बब्बर ने 1989 में राजनीति में प्रवेश किया और लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य रहे।
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