
एफसीएनआर जमा पर ब्याज दर सीमा में छूट, इस निर्णय के पीछे का संदर्भ एक ऐसे सहकर्मी के साथ समझने लायक है जो वित्तीय नीतियों पर नजर रखता है।

आरबीआई ने एफसीएनआर जमा पर ब्याज सीमा हटाई कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी मुद्रा जमा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एफसीएनआर(बी) और एनआरई जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को अस्थायी रूप से हटा दिया है। यह छूट 17 जून, 2026 से लागू हुई है और 30 सितंबर, 2026 तक जारी रहेगी। इसके तहत बैंक अब तीन से पांच साल की अवधि वाली नई एफसीएनआर(बी) जमा पर बिना किसी ऊपरी सीमा के ब्याज दर ऑफर कर सकते हैं। इस निर्णय में परिपक्वता के बाद नवीनीकृत जमा राशि भी शामिल हैं।
एफसीएनआर(बी) एक सावधि जमा योजना है जिसके तहत प्रवासी भारतीय (एनआरआई) अपनी विदेशी मुद्रा में अर्जित आय को भारतीय बैंकों में जमा कर सकते हैं। आरबीआई का यह कदम विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ावा देने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। यह निर्णय बैंकों को अधिक लचीला ब्याज दर नीति अपनाने की अनुमति देता है।
इस छूट के तहत तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि वाले एनआरई जमाओं पर लागू ब्याज दर संबंधी प्रतिबंध भी अस्थायी रूप से समाप्त कर दिए गए हैं। आरबीआई ने इस संबंध में एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट किया कि यह छूट बुधवार, 17 जून से प्रभावी हो गई है। अगले कुछ महीनों में बैंकों की ओर से कितनी महत्वपूर्ण जमा राशि आती है, यह निर्णय की प्रभावशीलता का संकेत देगा।
तथ्य
- आरबीआई ने 17 जून, 2026 से 30 सितंबर, 2026 तक एफसीएनआर(बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा अस्थायी रूप से हटा दी है।
- यह छूट तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली नई एफसीएनआर(बी) जमा और नवीनीकृत जमा राशि पर लागू होती है।
- तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि वाले एनआरई जमाओं पर ब्याज दर संबंधी प्रतिबंध भी 30 सितंबर, 2026 तक के लिए अस्थायी रूप से समाप्त कर दिए गए हैं।
- एफसीएनआर(बी) योजना के तहत प्रवासी भारतीय अपनी विदेशी मुद्रा आय को भारत में जमा कर सकते हैं।
- आरबीआई का यह कदम विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
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