
चांद जितने ग्रह के टूटने का यह सबूत, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देता है।

चांद जितना ग्रह टूटा, सहारा में मिला सबूत कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
सहारा रेगिस्तान में मिला एक दुर्लभ उल्कापिंड, NWA 12774, हमारे सौर मंडल के एक खोए हुए ग्रह के अस्तित्व का सबूत दे रहा है। यह 454 ग्राम का पत्थर 2019 में खोजा गया था और अब वैज्ञानिकों ने इसकी गहन जांच कर एक आश्चर्यजनक खोज की है। इसकी रासायनिक संरचना और अंदर मौजूद खनिजों के क्रिस्टल्स से पता चलता है कि यह पृथ्वी या मंगल जैसे सामान्य ग्रहों से बिलकुल अलग था।
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के भूवैज्ञानिक आरोन बेल की टीम ने पाया कि इस उल्कापिंड के अंदर क्लिनोपायरोक्सीन नामक खनिज में असामान्य रूप से अधिक एल्युमिनियम था। यह संकेत करता है कि यह चट्टान अत्यधिक दबाव में बनी — कम से कम 17.5 किलोबार, जो मरियाना ट्रेंच से भी 17 गुना ज्यादा है। इतना भारी दबाव किसी छोटे उल्कापिंड में नहीं बन सकता, जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि इसका मूल ग्रह बहुत बड़ा था।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह खोया हुआ ग्रह कम से कम 1800 किलोमीटर त्रिज्या का था — यानी हमारे चांद के आकार का। यह आकार मंगल ग्रह के करीब था। इसका अस्तित्व सौर मंडल के बनने के कुछ मिलियन साल बाद था। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह ग्रह किसी भीषण टकराव में नष्ट हो गया और इसके मलबे के टुकड़े अंतरिक्ष में बिखर गए। NWA 12774 उन्हीं टुकड़ों में से एक है।
तथ्य
- सहारा रेगिस्तान में मिला उल्कापिंड NWA 12774 454 ग्राम का है और 2019 में खोजा गया था।
- इसकी रासायनिक संरचना से पता चलता है कि यह चांद जितने आकार के एक खोए हुए ग्रह का हिस्सा है।
- इसके अंदर के खनिजों में अत्यधिक एल्युमिनियम मिला, जो इसके अत्यधिक दबाव में बनने का संकेत देता है।
- वैज्ञानिकों के अनुसार इसके मूल ग्रह की त्रिज्या कम से कम 1800 किलोमीटर थी।
- यह ग्रह शुरुआती सौर मंडल में किसी भीषण टकराव में नष्ट हो गया होगा।
- यह शोध Earth and Planetary Science Letters जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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