एक न्यायालय कक्ष में न्यायाधीश बैठे हैं, सामने सलमान खान के पड़ोसी के सोशल मीडिया पोस्ट की छवि दिख रही है, जिस पर 'हटाएं' का निशान लगा है।
एक न्यायालय कक्ष में न्यायाधीश बैठे हैं, सामने सलमान खान के पड़ोसी के सोशल मीडिया पोस्ट की छवि दिख रही है, जिस पर 'हटाएं' का निशान लगा है।

सोशल मीडिया पर शिकायत करना कानूनी रास्ते से अलग है, यह बात एक दोस्त के लिए भी समझने लायक है जो विवादों में भावनाओं पर भरोसा करता हो।

बॉम्बे HC ने सलमान खान के पड़ोसी को दिया निर्देश कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सलमान खान के पनवेल स्थित फार्महाउस के पड़ोसी केतन कक्कड़ को उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट और वीडियो हटाने पर विचार करने का सुझाव दिया है। कक्कड़ ने आरोप लगाया था कि खान ने फार्महाउस निर्माण के दौरान पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया और उनकी जमीन तक पहुंच के रास्ते ब्लॉक किए। उन्होंने इस मुद्दे को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाने की भी बात कही, लेकिन कार्रवाई न होने का दावा किया।

इसके जवाब में सलमान खान ने मानहानि का मुकदमा दायर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि कक्कड़ के पोस्ट मानहानिकारक थे और सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने वाले भी थे। खान की ओर से यह भी कहा गया कि वीडियो को काफी लोगों ने देखा और प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी पक्षकार बनाया, जिसमें फेसबुक, एक्स, गूगल और यूट्यूब शामिल हैं।

न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया तक पहुंच होने का मतलब यह नहीं कि कोई मशहूर हस्ति या आम नागरिक के खिलाफ मानहानि कर सकता है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या न्यायालय का समय इस बात पर खर्च हो कि कोई पोस्ट मानहानिकारक है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है।

तथ्य

  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने सलमान खान के पड़ोसी केतन कक्कड़ को उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर विचार करने को कहा।
  • कक्कड़ ने आरोप लगाया कि खान ने फार्महाउस निर्माण में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया और उनकी जमीन तक पहुंच ब्लॉक की।
  • सलमान खान ने मानहानि का मुकदमा दायर किया, जिसमें कहा गया कि पोस्ट सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले थे।
  • मुकदमे में फेसबुक, एक्स, गूगल और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पक्षकार बनाया गया है।
  • न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने कहा कि सोशल मीडिया तक पहुंच होने का मतलब यह नहीं कि कोई मानहानि कर सकता है।
  • अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

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