
डिजिटल तकनीक से संस्कृति का प्रसार अब एक वैश्विक रुझान बन चुका है, जो इस विषय में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के लिए भी उपयोगी संदर्भ ला सकता है।

प्रौद्योगिकी से संस्कृति का निर्यात कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
आधुनिक तकनीक के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में बचाया और प्रसारित किया जा रहा है। दक्षिण कोरिया, चीन और फ्रांस जैसे देश अपनी पारंपरिक वास्तुकला, कला और लोककथाओं को वर्चुअल रियलिटी, सोशल मीडिया और एआई के जरिए दुनिया भर में पहुंचा रहे हैं। दक्षिण कोरिया ने 2030 तक 'के-संस्कृति' के लिए 300 ट्रिलियन वॉन का बाजार बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी तरह, चीन टिकटॉक और डौयिन के माध्यम से पारंपरिक सुलेख और वेशभूषा को वैश्विक मंच पर ला रहा है। फ्रांस के लूव्र संग्रहालय ने वर्चुअल टूर और बहुभाषी वीडियो के माध्यम से ऐतिहासिक कहानियों को जीवंत किया है।
तथ्य
- दक्षिण कोरिया 2030 तक 'के-संस्कृति' के लिए 300 ट्रिलियन वॉन का बाजार बनाने का लक्ष्य रखता है।
- चीन टिकटॉक और डौयिन के माध्यम से पारंपरिक सुलेख और वेशभूषा को वैश्विक स्तर पर प्रसारित कर रहा है।
- फ्रांस के लूव्र संग्रहालय ने वर्चुअल रियलिटी टूर और बहुभाषी वीडियो सामग्री विकसित की है।
- हनोई में 1,350 शिल्प गाँव हैं और थांग लॉन्ग इंपीरियल गढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं।
- यूनेस्को के अनुसार डिजिटल तकनीक सांस्कृतिक स्मृति के संरक्षण में अभूतपूर्व मदद कर रही है।
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