एक अमेरिकी अदालत ने एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस को अवैध घोषित कर दिया है, जो ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई थी।
एक अमेरिकी अदालत ने एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस को अवैध घोषित कर दिया है, जो ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई थी।

एच-1बी वीजा पर भारी फीस वापस लेना, इस नीति को देख रहे किसी दोस्त या सहकर्मी के साथ समझने लायक संदर्भ देता है।

एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस रद्द कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

अमेरिकी एक फेडरल जज ने ट्रंप प्रशासन की ओर से लागू की गई 1 लाख डॉलर की एच-1बी वीजा फीस को अवैध घोषित कर दिया है। जज लियो सोरोकिन ने अपने 42 पन्नों के फैसले में कहा कि कांग्रेस की अनुमति के बिना ऐसी फीस लगाना कानूनी अधिकार से परे है। यह फीस पिछले साल ट्रंप द्वारा एक कार्यकारी आदेश के तहत लागू की गई थी।

एच-1बी वीजा कार्यक्रम 1990 में कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया था, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां उच्च कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नियुक्त कर सकती हैं। हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं, जिनमें उच्च डिग्री धारकों के लिए 20,000 अतिरिक्त शामिल हैं।

इस फैसले का विशेष प्रभाव भारतीय नागरिकों पर पड़ सकता है, क्योंकि वित्त वर्ष 2024 में जारी किए गए एच-1बी वीजा में 71% लाभार्थी भारत के थे। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने फैसले को 'राजनीतिक विचारों पर आधारित' करार दिया है, लेकिन कानूनी राय स्पष्ट है कि ऐसी फीस केवल कांग्रेस की मंजूरी से ही लागू हो सकती है।

तथ्य

  • अमेरिकी जिला जज लियो सोरोकिन ने एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस को अवैध घोषित किया।
  • फीस के खिलाफ 20 राज्यों ने सितंबर में याचिका दायर की थी।
  • जज ने कहा कि कांग्रेस के बिना ऐसी फीस लगाना कानूनी अधिकार से परे है।
  • एच-1बी वीजा कार्यक्रम 1990 में कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया था।
  • वित्त वर्ष 2024 में जारी एच-1बी वीजा में 71% लाभार्थी भारत के थे।

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