
अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान की शर्तें साफ हैं, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी दोस्त के लिए संदर्भ उपयोगी हो सकता है।

ईरान ने कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता खारिज की कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
ईरान ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों को अस्वीकार कर दिया है और स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल द्विपक्षीय ढांचे में होगी। तेहरान का कहना है कि अमेरिका को पहले अपने वादों को पूरा करना होगा, जिसमें ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाना और जमे हुए देश के संपत्ति की वापसी शामिल है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के बाद आया है।
स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न में हुई चार-पक्षीय बातचीत में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के नेता शामिल हुए। अमेरिकी टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और जेरेड कुशनर शामिल थे, जबकि ईरान का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया। बातचीत के बाद ईरान ने स्पष्ट किया कि वह किसी बहुपक्षीय फॉर्मेट में नहीं जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने दावा किया कि तेल प्रतिबंध हट चुके हैं और कुछ जमी हुई संपत्ति वापस मिल गई है। लेकिन अमेरिकी ओर से इस पर कोई पुष्टि नहीं हुई है। अब अगली चुनौती लेबनान में युद्धविराम को लागू करना है, जहां ईरान की भूमिका अहम मानी जा रही है।
तथ्य
- ईरान ने कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता पर पानी फेर दिया और चार-पक्षीय फॉर्मेट में शामिल नहीं होने की घोषणा की।
- ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका को पहले अपने वादे पूरे करने चाहिए, जिसमें तेल प्रतिबंध हटाना और जमी संपत्ति वापस करना शामिल है।
- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न में हुई, जिसमें पाकिस्तान और कतर के नेता भी शामिल हुए।
- ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के बाद चार-पक्षीय फॉर्मेट आगे नहीं बढ़ेगा।
- ईरानी विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हट गए हैं और कुछ जमी संपत्ति वापस मिल गई है, लेकिन अमेरिकी ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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