
अमेरिका की धमकी और नेतन्याहू का अलग रास्ता, एक दोस्त जो मध्य पूर्व की राजनीति देख रहा है उसके लिए यह संदर्भ जरूरी है।

ईरान ने वार्ता से किया वॉकआउट कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई शांति वार्ता अचानक टूट गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा डालता है या उसके सहयोगी हिज्बुल्लाह लेबनान में गड़बड़ी करते हैं, तो अमेरिका ईरान को 'पूरी तरह तबाह' कर देगा। इस धमकी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक छोड़ दी और वापस लौटने से इनकार कर दिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि धमकी भरा बयान सीजफायर समझौते के 'अनुच्छेद 1' का उल्लंघन है। वार्ता में कतर और पाकिस्तान भी शामिल थे, जिन्होंने बातचीत जारी रखने का प्रयास किया। दोनों देशों ने 60-दिन के रोडमैप की घोषणा की और उच्चस्तरीय समिति बनाई, लेकिन ट्रंप के बयान ने प्रगति को झटका दिया।
इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ समन्वय छोड़ते हुए लेबनान पर लगातार हमले जारी रखे हैं। उन्होंने साफ कहा कि वे अपनी सुरक्षा के मामले में किसी के दबाव में नहीं आएंगे। ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इजरायल हिज्बुल्लाह से निपटने में असफल रहा है और सीरिया को भूमिका देने पर विचार कर रहे हैं, जिसे सीरिया ने तुरंत अस्वीकार कर दिया।
तथ्य
- 22 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दौरान ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य या हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी।
- ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने धमकी को सीजफायर समझौते के 'अनुच्छेद 1' का उल्लंघन बताते हुए वार्ता से वॉकआउट कर लिया।
- कतर और पाकिस्तान ने 60-दिन के रोडमैप और उच्चस्तरीय समिति की घोषणा की, लेकिन ट्रंप के बयान ने प्रगति को रोक दिया।
- इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने अमेरिका के विरोध के बावजूद लेबनान पर लगातार हमले जारी रखे।
- ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि वह सीरिया को लेबनान में भूमिका देने पर विचार कर रहे हैं, जिसे सीरिया ने तुरंत अस्वीकार कर दिया।
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