
नार्लीकर का ब्रह्मांड सिद्धांत पर काम, इस विषय में रुचि रखने वाले किसी दोस्त के लिए भी समझने लायक संदर्भ देता है।

जयंत नार्लीकर को मिला विज्ञान रत्न कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
प्रसिद्ध भारतीय खगोल भौतिक विज्ञानी जयंत नार्लीकर को 2025 के लिए विज्ञान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो भारत का सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मान है। यह पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किया गया है, क्योंकि नार्लीकर का निधन 20 मई 2025 को 86 वर्ष की आयु में हो गया था। नार्लीकर ने ब्रिटिश खगोलशास्त्री फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर 'स्थिर अवस्था सिद्धांत' का प्रतिपादन किया, जिसमें यह विचार दिया गया कि ब्रह्मांड एक बिग बैंग से नहीं, बल्कि लगातार नए पदार्थों के निर्माण के साथ अस्तित्व में है।
इस पुरस्कार की घोषणा 25 अक्टूबर 2025 को की गई, और यह राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों के दूसरे संस्करण का हिस्सा है, जो 2023 में शुरू किए गए थे। विज्ञान रत्न के साथ, आठ वैज्ञानिकों को विज्ञान श्री पुरस्कार और 14 युवा वैज्ञानिकों को विज्ञान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
विज्ञान श्री पुरस्कार विजेताओं में कृषि वैज्ञानिक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, भौतिक वैज्ञानिक यूसुफ मोहम्मद शेख और आईआईटी-मद्रास के प्रदीप थलप्पिल शामिल हैं। सीएसआईआर की अरोमा मिशन टीम को विज्ञान टीम पुरस्कार दिया गया, जिसने जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर उत्पादन को बढ़ावा दिया। विज्ञान युवा पुरस्कार 14 युवा शोधकर्ताओं को विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए दिए गए।
तथ्य
- जयंत नार्लीकर को 25 अक्टूबर 2025 को विज्ञान रत्न पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया।
- नार्लीकर का निधन 20 मई 2025 को 86 वर्ष की आयु में हो गया था।
- नार्लीकर ने फ्रेड हॉयल के साथ 'स्थिर अवस्था सिद्धांत' पर काम किया, जो बिग बैंग सिद्धांत के विकल्प के रूप में था।
- 2025 में आठ वैज्ञानिकों को विज्ञान श्री पुरस्कार और 14 युवा शोधकर्ताओं को विज्ञान युवा पुरस्कार दिए गए।
- CSIR की अरोमा मिशन टीम को जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर मिशन के लिए विज्ञान टीम पुरस्कार दिया गया।
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