
चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति की तैयारी, एक दोस्त जो अंतरिक्ष अन्वेषण देख रहा है, उसके लिए भी समझने लायक संदर्भ देती है।

नासा की चंद्रमा पर स्थायी अड्डा बनाने की योजना कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
नासा ने चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाने के लिए एक व्यापक रोडमैप जारी किया है, जो मानव उपस्थिति को लंबे समय तक बढ़ाने और मंगल ग्रह के भविष्य के मिशनों के लिए आधार तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। एजेंसी ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को लक्ष्य बनाया है, जहां बर्फीले जल के संसाधन मौजूद होने की संभावना है। यह जल भविष्य में ईंधन उत्पादन और जीवन समर्थन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस परियोजना में नासा ने निजी कंपनियों के साथ गहन सहयोग किया है। ब्लू ओरिजिन, एस्ट्रोबोटिक, फायरफ्लाई एयरोस्पेस और अन्य कंपनियों को चंद्र लैंडर, रोवर और ड्रोन विकसित करने के लिए अनुबंध दिए गए हैं। तीन मुख्य मिशन — मून बेस 1, 2 और 3 — 2029 तक चंद्र सतह पर प्रौद्योगिकी परीक्षण, सर्वेक्षण और बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए लॉन्च किए जाएंगे।
पहले चरण में लगभग 25 प्रक्षेपण और 21 लैंडिंग के माध्यम से 4 टन कार्गो चंद्रमा पर पहुंचाया जाएगा। दूसरे चरण (2029–2032) में बिजली प्रणाली और रहने के लिए सुविधाओं का निर्माण शुरू होगा। लक्ष्य 2030 के दशक तक मानव की स्थायी उपस्थिति स्थापित करना है। यह परियोजना आर्टेमिस कार्यक्रम के समानांतर चल रही है, जो मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस ले जाने का लक्ष्य रखता है।
तथ्य
- नासा ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी बेस बनाने के लिए रोडमैप जारी किया है।
- पहले चरण में 2029 तक 25 प्रक्षेपण और 21 लैंडिंग के माध्यम से 4 टन कार्गो चंद्रमा पर पहुंचाया जाएगा।
- मून बेस 1 मिशन के लिए ब्लू ओरिजिन को अनुबंध दिया गया है, जो निजी वित्त पोषित पहला चंद्र लैंडिंग मिशन होगा।
- एस्ट्रोलैब और लूनर आउटपोस्ट को स्वायत्त रोवर बनाने के लिए 220 मिलियन डॉलर का अनुबंध मिला।
- फायरफ्लाई एयरोस्पेस को चंद्र दक्षिणी ध्रुव का सर्वेक्षण करने के लिए ड्रोन विकसित करने के लिए 75 मिलियन डॉलर दिए गए।
- लक्ष्य 2030 के दशक तक चंद्रमा पर मानव की स्थायी उपस्थिति स्थापित करना है।
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