
एक ही शेयर की अलग-अलग एक्सचेंज पर अलग कीमतें, इस बदलाव के बाद निवेशकों के लिए स्पष्टता बढ़ सकती है, एक दोस्त जो शेयर बाजार देखता है उसके लिए यह संदर्भ उपयोगी हो सकता है।

एक शेयर, अलग-अलग कीमतें: सेबी का नया नियम क्यों? कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कई स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध शेयरों के लिए एकरूप प्राइस बैंड तंत्र का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में, अलग-अलग एक्सचेंज अपने पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस के आधार पर अलग-अलग प्राइस बैंड लागू करते हैं, जिससे एक ही शेयर की कीमतों में अंतर आ जाता है। यह समस्या तब बढ़ती है जब कोई शेयर एक एक्सचेंज पर तो ट्रेड होता है, लेकिन दूसरे पर नहीं, जिससे क्लोजिंग प्राइस में फर्क आता है।
सेबी के प्रस्ताव के अनुसार, अगर कोई शेयर केवल एक एक्सचेंज पर ट्रेड हुआ है, तो अन्य एक्सचेंज उसी क्लोजिंग प्राइस के आधार पर अगले दिन के प्राइस बैंड और प्री-ओपन कॉल ऑक्शन के लिए बेस प्राइस तय करेंगे। अगर शेयर दो या अधिक एक्सचेंजों पर ट्रेड हुआ है, तो जिस एक्सचेंज पर सबसे अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम रहा हो, उसके क्लोजिंग प्राइस को आधार माना जाएगा।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य बाजार में अधिक पारदर्शिता और स्थिरता लाना है। सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों से इस तंत्र को लागू करने के लिए क्लोजिंग-प्राइस डेटा साझा करने के लिए समझौते करने या उचित व्यवस्था बनाने का भी सुझाव दिया है। नियामक ने इन प्रस्तावों पर 2 जुलाई 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
तथ्य
- सेबी ने कई एक्सचेंजों पर लिस्टेड शेयरों के लिए एकरूप प्राइस बैंड तंत्र का प्रस्ताव रखा है।
- अगर कोई शेयर केवल एक एक्सचेंज पर ट्रेड हुआ है, तो अन्य एक्सचेंज उसी क्लोजिंग प्राइस के आधार पर प्राइस बैंड तय करेंगे।
- अगर शेयर एक से अधिक एक्सचेंज पर ट्रेड हुआ है, तो सबसे अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले एक्सचेंज के क्लोजिंग प्राइस को आधार माना जाएगा।
- सेबी ने इन प्रस्तावों पर 2 जुलाई 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
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