
सूरज के ऊपर आने पर परछाई गायब होना, इस बदलाव को देख रहे किसी दोस्त के साथ समझने लायक संदर्भ देता है।

21 जून: साल का सबसे लंबा दिन कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
21 जून को उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति मनाई जाती है, जो साल का सबसे लंबा दिन होता है। यह खगोलीय घटना पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण होती है, जिससे उत्तरी गोलार्ध सूरज की ओर अधिकतम झुकाव तक पहुंच जाता है। इस दिन सूरज कर्क रेखा के ठीक ऊपर होता है और दोपहर के समय कई स्थानों पर परछाई नहीं दिखती, जिसे 'जीरो शैडो डे' कहा जाता है।
ग्रीष्म संक्रांति का सटीक समय 21 जून को 09:24 BST था। हालांकि यह आमतौर पर 21 जून को होता है, लेकिन लीप ईयर के कारण यह 20 या 22 जून को भी हो सकता है। पृथ्वी के झुकाव के कारण ही मौसम बदलते हैं। अगर ऐसा न होता, तो पूरे साल दिन की रोशनी लगभग एक जैसी रहती।
खगोलीय गर्मी की शुरुआत ग्रीष्म संक्रांति से मानी जाती है, लेकिन मौसम विज्ञान में गर्मी की अवधि 1 जून से 31 अगस्त तक मानी जाती है। यह अंतर इसलिए है ताकि मौसमी आंकड़ों की तुलना आसानी से की जा सके। ग्रीष्म संक्रांति का नाम लैटिन शब्दों 'सोल' (सूरज) और 'सिस्टेरे' (स्थिर होना) से आया है, जो सूरज की आकाशीय गति में ठहराव को दर्शाता है।
तथ्य
- 21 जून 2026 को उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति है, जो साल का सबसे लंबा दिन है।
- ग्रीष्म संक्रांति का सटीक समय 21 जून को 09:24 BST था।
- इस दिन सूरज कर्क रेखा के ठीक ऊपर होता है और कई स्थानों पर परछाई नहीं दिखती, जिसे 'जीरो शैडो डे' कहते हैं।
- ग्रीष्म संक्रांति का नाम लैटिन शब्दों 'सोल' (सूरज) और 'सिस्टेरे' (स्थिर होना) से आया है।
- मौसम विज्ञान में गर्मी की अवधि 1 जून से 31 अगस्त तक मानी जाती है, जबकि खगोलीय गर्मी ग्रीष्म संक्रांति से शुरू होती है।
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