समुद्र तल पर व्हेल के कंकाल और उस पर निर्भर जीवों का एक दृश्य, जिसमें घोंघे, कीड़े और क्रस्टेशियन शामिल हैं।
समुद्र तल पर व्हेल के कंकाल और उस पर निर्भर जीवों का एक दृश्य, जिसमें घोंघे, कीड़े और क्रस्टेशियन शामिल हैं।

व्हेल के शव गहरे समुद्र में दशकों तक जीवन को पोषित करते हैं, इस बात को समझने वाले किसी दोस्त के लिए उपयोगी संदर्भ।

इतिहास का सबसे बड़ा व्हेल कब्रिस्तान कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

वैज्ञानिकों ने दक्षिणपूर्वी हिंद महासागर के डायमंटिना फॉल्ट ज़ोन में अब तक का सबसे बड़ा व्हेल कब्रिस्तान खोजा है। यहां 485 से अधिक व्हेल जीवाश्म और कई आधुनिक व्हेल के शव मिले हैं, जो समुद्र तल पर दशकों तक जीवन को पोषित करते हैं। यह स्थल लगभग 1,200 किमी तक फैला हुआ है और कुछ जीवाश्म 50 लाख साल पुराने हैं।

इस खोज से पता चलता है कि मृत व्हेल समुद्र की गहराई में एक विशाल कार्बन स्रोत बन जाती हैं, जो 400 टन से अधिक कार्बनिक पदार्थ के बराबर होता है। इससे हजारों जीवों को ऊर्जा मिलती है, जिनमें हड्डी खाने वाले कीड़े, घोंघे और विशेष जीवाणु शामिल हैं।

वैज्ञानिकों को आश्चर्य है कि इतने सारे व्हेल शव इस क्षेत्र में क्यों केंद्रित हैं। संभावना है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही व्हेल प्रवास मार्ग या प्राकृतिक आवास रहा हो। डायमंटिना की वी-आकार की स्थलाकृति भी शवों के एकत्रीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

तथ्य

  • डायमंटिना फॉल्ट ज़ोन में 485 से अधिक व्हेल जीवाश्म स्थल पाए गए हैं।
  • कुछ जीवाश्म 50 लाख साल पुराने हैं और प्टेरोसेटस बेंग्यूले जैसी प्राचीन प्रजातियों से संबंधित हैं।
  • एक मृत व्हेल 400 टन कार्बनिक पदार्थ के बराबर पोषण प्रदान कर सकती है।
  • वैज्ञानिकों ने प्रति वर्ग किमी लगभग 800 व्हेल कंकालों का घनत्व दर्ज किया।
  • व्हेल के शवों पर कम से कम 40 प्रजातियाँ और हजारों जीव निर्भर रहते हैं।

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