एक रेगिस्तानी चट्टान पर हरी काई के नमूने के क्लोज-अप में माइक्रोस्कोप द्वारा देखे गए फंगस के शाखित संरचना को नीली डाई से चिह्नित किया गया है।
एक रेगिस्तानी चट्टान पर हरी काई के नमूने के क्लोज-अप में माइक्रोस्कोप द्वारा देखे गए फंगस के शाखित संरचना को नीली डाई से चिह्नित किया गया है।

पौधों के जमीन पर आने का यह सबूत, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी सहकर्मी के लिए भी समझने लायक है।

रेगिस्तानी काई में छिपा था 47 करोड़ साल का रहस्य कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रेगिस्तानी काई के अंदर फंगस के सहजीवन के पहले सबूत खोजे हैं। यह खोज पौधों के जल से स्थल पर आने के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण है। पहले माना जाता था कि काई अकेले जीवित रहती है, लेकिन अब डीएनए और माइक्रोस्कोप अध्ययन से पता चला है कि यह फंगस के साथ पोषक तत्वों का आदान-प्रदान कर सकती है।

शोधकर्ता कियान केली ने मोजावे और सोनोरन रेगिस्तान में 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में काई के नमूने एकत्र किए। लैब में डीएनए विश्लेषण और विशेष डाई के साथ माइक्रोस्कोप अध्ययन से फंगस के शाखित संरचना की पुष्टि हुई। यह संरचना आमतौर पर जड़ों में बनती है, लेकिन काई में जड़ें नहीं होतीं — फिर भी फंगस पत्तियों के अंदर मौजूद था।

यह खोज न केवल पौधों के विकास के इतिहास को बदल सकती है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी मददगार हो सकती है। रेगिस्तानी काई के सॉइल क्रस्ट को बहाल करने में यह जानकारी उपयोगी हो सकती है। अगले चरण में शोधकर्ता यह जांचेंगे कि क्या वास्तव में न्यूट्रिएंट्स का आदान-प्रदान हो रहा है।

तथ्य

  • कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रेगिस्तानी काई में फंगस के सहजीवन के सबूत खोजे।
  • फंगस का डीएनए और माइक्रोस्कोप द्वारा पुष्टि की गई, जिसकी संरचना पत्तियों में मिली, न कि जड़ों में।
  • यह खोज 47 करोड़ साल पहले पौधों के जल से स्थल पर आने की प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकती है।
  • शोधकर्ता कियान केली ने मोजावे और सोनोरन रेगिस्तान में नमूने एकत्र किए।
  • अगले चरण में जांच होगी कि क्या काई और फंगस के बीच पोषक तत्वों का आदान-प्रदान हो रहा है।

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