कालाहारी रेगिस्तान के नीचे गहरी गुफा में अंधेरे में चमकती झील और उसमें तैरती बिना आंखों वाली मछलियां दिखाई दे रही हैं।
कालाहारी रेगिस्तान के नीचे गहरी गुफा में अंधेरे में चमकती झील और उसमें तैरती बिना आंखों वाली मछलियां दिखाई दे रही हैं।

इस अंधेरी झील में बिना आंखों वाली मछलियां और झींगे रहते हैं, जो रोशनी के बिना भी जीवन बचाए हुए हैं, इस अद्भुत खोज के बारे में जानना उस दोस्त के लिए भी दिलचस्प होगा जो प्रकृति के रहस्यों में रुचि रखता है।

866 फीट गहरी झील में बिना आंखों वाले जीव कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

दक्षिण अफ्रीका के कालाहारी रेगिस्तान के नीचे वैज्ञानिकों ने 'ड्रैगन्स ब्रेथ केव' नामक एक विशाल गुफा में 264 मीटर (लगभग 866 फीट) गहरी दुनिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड झील की खोज की है। यह झील करोड़ों सालों से पूरी तरह अंधेरे में मौजूद है, जहां सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंची। इस गुफा के नामकरण का कारण इसके मुंह से निकलने वाली गर्म, नमी वाली हवा है, जो ड्रैगन की सांस जैसी दिखती है।

गहराई के कारण मानव गोताखोरों के लिए अंत तक पहुंचना लगभग असंभव था। 2015 तक गोताखोर सिर्फ 132 मीटर तक पहुंच पाए थे। रहस्य को सुलझाने के लिए एक उन्नत ऑटोनॉमस अंडरवॉटर रोबोट 'सनफिश' का उपयोग किया गया, जिसने हाई-टेक सोनार मैपिंग के जरिए झील की वास्तविक गहराई का पता लगाया।

सबसे बड़ी खोज इस झील में रहने वाले अद्वितीय जीवों की थी। यहां बिना आंखों वाली सुनहरी कैटफिश और एक दुर्लभ सफेद झींगा, जिसका वैज्ञानिक नाम 'ड्रैगन की आत्मा' है, पाए गए। ये जीव लाखों सालों तक अलग होने के कारण विकास के जरिए अंधेरे में जीवित रहने के लिए अनुकूलित हो गए हैं।

इन जीवों के जीवन का रहस्य 'कीमोसिंथेसिस' में छिपा है। गुफा की दीवारों पर उगने वाले विशेष बैक्टीरिया गंधक और खनिजों से ऊर्जा बनाते हैं। इनके अलावा, बारिश या चमगादड़ों के कचरे से आने वाला जैविक पदार्थ भी इस इकोसिस्टम को सहारा देता है। इन जीवों की धीमी चयापचय दर उन्हें कम ऊर्जा में भी लंबे समय तक जीवित रहने में मदद करती है।

तथ्य

  • दक्षिण अफ्रीका के कालाहारी रेगिस्तान के नीचे 'ड्रैगन्स ब्रेथ केव' नामक गुफा में 264 मीटर (866 फीट) गहरी दुनिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड झील मिली है।
  • इस झील में बिना आंखों वाली सुनहरी कैटफिश और एक दुर्लभ सफेद झींगा, जिसका वैज्ञानिक नाम 'ड्रैगन की आत्मा' है, पाए गए हैं।
  • इन जीवों के जीवन का आधार 'कीमोसिंथेसिस' है, जहां बैक्टीरिया गंधक और खनिजों से ऊर्जा बनाते हैं।
  • गुफा के मुंह से निकलने वाली गर्म, नमी वाली हवा इसे 'ड्रैगन की सांस' की तरह दिखाती है, जिससे इसका नाम पड़ा।
  • 2015 में एक गोताखोर टीम 132 मीटर तक पहुंची, लेकिन झील की वास्तविक गहराई का पता लगाने के लिए ऑटोनॉमस रोबोट 'सनफिश' का उपयोग किया गया।

Canto का विज़ुअल न्यूज़ एक्सप्लेनर। उत्पादन में AI टूल सहायता कर सकते हैं। संपादकीय नीति