एक एक्स-रे और रेडियो छवि जिसमें आकाशगंगा के केंद्र के पास सुपरनोवा अवशेष सैजिटेरियस सी नीले रंग में दिखाया गया है, जो एक गैसीय बुलबुले के भीतर स्थित है।
एक एक्स-रे और रेडियो छवि जिसमें आकाशगंगा के केंद्र के पास सुपरनोवा अवशेष सैजिटेरियस सी नीले रंग में दिखाया गया है, जो एक गैसीय बुलबुले के भीतर स्थित है।

यह अवशेष नए तारों और ग्रहों के निर्माण में मदद कर सकता है, खासकर उस दोस्त के लिए जो ब्रह्मांड के चक्रों में रुचि रखता है।

32 लाख किमी/घंटा की रफ्तार से भाग रहा अंतरिक्ष का मलबा कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य

नासा के चंद्रा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी ने हमारी आकाशगंगा, मिल्की वे के केंद्र में एक सुपरनोवा के अवशेष की खोज की है। इस अवशेष को 'सैजिटेरियस सी' नाम दिया गया है और यह पृथ्वी से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह खोज गैलेक्सी के सुपरमैसिव ब्लैक होल, सैजिटेरियस ए के बेहद निकट मिला है, जो इसे अब तक का सबसे करीबी सुपरनोवा अवशेष बनाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तारा लगभग 1700 साल पहले विस्फोटित हुआ था। अब भी इसका मलबा अंतरिक्ष में 32 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फैल रहा है। यह अवशेष आयनीकृत हाइड्रोजन गैस के एक विशाल बुलबुले के भीतर स्थित है, जो रेडियो तरंगों का एक चमकीला स्रोत है।

सुपरनोवा अवशेष आकाशगंगा के रासायनिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब भारी तारे विस्फोट करते हैं, तो वे भारी तत्वों को अंतरिक्ष में बिखेर देते हैं, जो नए तारों और ग्रहों के निर्माण के लिए आवश्यक होते हैं। इस प्रकार की खोजें ब्रह्मांड में पदार्थ के चक्रीकरण को समझने में मदद करती हैं।

तथ्य

  • नासा के चंद्रा एक्स-रे स्पेसक्राफ्ट ने आकाशगंगा के केंद्र में सुपरनोवा अवशेष 'सैजिटेरियस सी' की खोज की है।
  • यह अवशेष पृथ्वी से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर है और सुपरमैसिव ब्लैक होल सैजिटेरियस ए के निकट स्थित है।
  • सुपरनोवा विस्फोट लगभग 1700 साल पहले हुआ था और इसका मलबा 3.2 मिलियन किमी/घंटा की रफ्तार से फैल रहा है।
  • यह अवशेष आयनीकृत हाइड्रोजन गैस के बुलबुले के भीतर है जो रेडियो तरंगों का चमकीला स्रोत है।
  • सुपरनोवा अवशेष नए तारों और ग्रहों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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