
लेबनान में टकराव कम करने की दिशा में यह कदम, इस विषय पर नजर रखने वाले किसी दोस्त के लिए भी समझने लायक संदर्भ देता है।

अमेरिका-ईरान ने लेबनान तनाव कम करने पर सहमति कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
अमेरिका और ईरान ने लेबनान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी वार्ता में एक 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' बनाने पर सहमति जताई है। यह कदम दोनों देशों के बीच 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत आया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सैन्य अभियानों को रोकना है। कतर और पाकिस्तान के संयुक्त बयान के अनुसार, यह सेल लेबनान में सैन्य गतिविधियों के अंत के पालन को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
tके बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है कि अगर वह अपने प्रॉक्सी समूहों का समर्थन जारी रखता है, तो अमेरिका 'बहुत कड़ा हमला' करेगा। इस पर ईरान ने तुरंत आलोचना की और इसे अमेरिकी बेचैनी का संकेत बताया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि वे धमकियों से नहीं डरते और जरूरत पड़ने पर जवाब देने के लिए तैयार हैं।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल के गठन को वार्ताओं की 'पहली वास्तविक परीक्षा' कहा। लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष मध्य पूर्व की अस्थिरता का एक संवेदनशील केंद्र बन गया है। ईरान लेबनान के खिलाफ आक्रामकता समाप्त करने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानता है।
तथ्य
- अमेरिका और ईरान ने स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी वार्ता में लेबनान में सैन्य टकराव रोकने के लिए एक 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' बनाने पर सहमति जताई।
- यह सहमति दोनों देशों के बीच 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत आई है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह अपने प्रॉक्सी समूहों का समर्थन जारी रखता है, तो अमेरिका 'बहुत कड़ा हमला' करेगा।
- ईरान ने ट्रंप की धमकियों को अमेरिकी बेचैनी का संकेत बताते हुए तुरंत खारिज किया।
- ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल के गठन को वार्ताओं की 'पहली वास्तविक परीक्षा' कहा।
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