
तारों के अंदर मिनी ब्रह्मांड का विचार, इस विज्ञान को देख रहे किसी दोस्त के लिए दिलचस्प संदर्भ लेकर आता है।

काले सूरज नहीं, तारों के अंदर बन सकता है मिनी ब्रह्मांड कहानी का प्रवाह और मुख्य तथ्य
वैज्ञानिक अब यह सवाल कर रहे हैं कि क्या मरते तारे हमेशा ब्लैक होल में नहीं बदलते। एक नए सिद्धांत के मुताबिक, बहुत बड़े तारे गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़ते हैं, लेकिन पूरी तरह नष्ट नहीं होते। इसके बजाय, उनके अंदर डार्क एनर्जी एक छोटे बिग बैंग की तरह काम कर सकती है और एक ग्रेवास्टार बन सकता है। ग्रेवास्टार एक अत्यधिक सघन वस्तु है जिसमें न तो सिंगुलैरिटी होती है और न ही इवेंट होराइजन, जो ब्लैक होल की परिभाषा है। इसलिए यह सिद्धांत आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के समीकरणों के साथ बेहतर तरीके से फिट बैठता है। अभी तक ग्रेवास्टार का कोई सीधा प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन यह विचार ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद कर सकता है।
तथ्य
- वैज्ञानिक डैनियल जाम्पोल्स्की और प्रोफेसर लुसियानो रेजोला ने ग्रेवास्टार सिद्धांत पर नई रिसर्च प्रकाशित की है।
- ग्रेवास्टार में सिंगुलैरिटी या इवेंट होराइजन नहीं होता, जो ब्लैक होल से इसे अलग करता है।
- ग्रेवास्टार के अंदर डार्क एनर्जी एक छोटे बिग बैंग की तरह काम कर सकती है और तारे के पूरी तरह ढहने से रोकती है।
- यह रिसर्च आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के समीकरणों पर आधारित है और फिजिकल रिव्यू डी जर्नल में प्रकाशित हुई है।
- अभी तक ग्रेवास्टार का कोई सीधा अवलोकन नहीं हुआ है, लेकिन यह सिद्धांत ब्लैक होल के रहस्यों को समझने में मदद कर सकता है।
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